Intraday Trading स्टॉक कैसे चुनें - Stock Market Hindi

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Intraday Trading स्टॉक कैसे चुनें

Intraday trading Stock कैसे चुने - इंट्राडे ट्रेडिंग में मुनाफा कमाने के लिए सही स्टॉक का चयन करना बहुत जरूरी है। एक सही स्टॉक के चयन करने के लिए किन किन बातों का ध्यान रखना चाहिए, इस पोस्ट में विस्तृत जानकारी के साथ बताया गया है।


इंट्राडे ट्रेडिंग एक जोखिम भरा निर्णय हों सकता है यदि आप ने इंट्राडे ट्रेडिंग के लिये पर्याप्त अध्यन नही किया है।

भारत मे ही नही बल्कि, विदेशों में भी इंट्राडे ट्रेडिंग का अपना क्रेज़ है। परन्तु यहां सफल होना बहुत मुश्किल है, और पुराने आँकडे बताते है कि केवल पांच प्रतिशत ट्रेडर से भी कम ट्रेडर इंट्राडे ट्रेडिंग से मुनाफा कमा पाते है।
Intraday stock


Intraday Trading के लिए स्टॉक का चयन करते समय निम्न बिन्दुओ का ध्यान अवश्य रखे।


Global मार्केट- भारतीय बाज़ार वैश्विक बाजार के अंतर्गत ही अपनी शुरुआत करते है यदि वैश्विक बाजार दवाब में हैं तो इसका असर भारतीय बाजार पर भी देखने को मिलेगा, किसी स्टॉक का चयन करते समय वैश्विक बाजारों पर अपनी नज़र अवश्य रखें। शेयर बाज़ार बेहद भावनात्मक तरीके से अपनी यात्रा तय करता है वैश्विक स्तर पर कोई भी बड़ी खबर किसी भी देश के शेयर बाजार के ट्रेंड को विपरीत दिशा में बदल सकती है। जिसका असर आपकी ट्रेडिंग पर भी पड़ सकता है।




निफ़्टी 50- भारतीय बाज़ार के ट्रेंड को अगर पकड़ना है। तो निफ़्टी 50 की चाल को समझना जरूरी है। क्योंकि यह एक ऐसा सूचकांक है जो भारतीय बाज़ार की तेजी और मंदी को दर्शाता है। जब भी ट्रेड करे, निफ़्टी 50 के ट्रेंड को ध्यान में रखे, जिस दिशा में निफ़्टी 50 ट्रेड कर रहा हो उसी दिशा में ट्रेड करे। यदि निफ़्टी 50 तेज़ी में हो, तो किसी तेज़ी वाले स्टॉक का चुनाव करे। शेयर बाज़ार में ट्रेंड ही फ्रेंड होता है।



सेक्टर आधारित स्टॉक- जब भी किसी स्टॉक का चुनाव इंट्राडे ट्रेडिंग के लिए करें, तो उस स्टॉक से संबंधित सेक्टर के इंडेक्स पर भी ध्यान अवश्य रखना चाहिए। यदि आप स्टेट बैंक ऑफ इंडिया को इंट्राडे ट्रेडिंग के लिए चुनते है तो बैंकनिफ्टी के ट्रेंड को अवश्य देखे, क्योंकि यह स्टॉक बैंकिंग सेक्टर से जुड़ा हुआ है तो बैंकनिफ्टी इंडेक्स को देखना आवश्यक हो जाता है। इसी तरह ल्युपिन में ट्रेड करते समय, फार्मा सेक्टर को देखना आवश्यक है। किसी स्टॉक में तेज़ी होने के बावजूद, उस स्टॉक से संबंधित सेक्टर में गिरावट आने पर उस स्टॉक में भी दवाब आ सकता है।


गैप अप और गैप डाउन स्टॉक- यह एक महत्वपूर्ण बिंदु है जिसके कारण इंट्राडे ट्रेडर नुकसान उठाते है। कभी भी गैप अप और गैप डाउन स्टॉक में ट्रेड ना करें। यह स्टॉक तेज़ी से अपनी चाल बदलते है और ट्रेडर अपना स्टॉपलॉस गवा बैठते है। कोई स्टॉक यदि बाज़ार खुलने के समय तीन चार प्रतिशत की तेजी अथवा मंदी के साथ खुलता है तो आवश्यक नही है कि उसमें और तेज़ी अथवा मंदी होगी। ऐसे स्टॉक से दूरी बनाना ही उचित होगा।

ओपनिंग प्राइस- किसी स्टॉक का ओपनिंग प्राइस एक महत्वपूर्ण पॉइंट होता है जो किसी स्टॉक में होने वाले बदलाव को सबसे पहले बताता है। इसका इस्तेमाल इंट्राडे ट्रेडर सबसे ज्यादा करते है। यदि किसी स्टॉक का ओपनिंग प्राइस और उसका निचला प्राइस दोनों एक है तो उस स्टॉक में तेज़ी की पोजीशन बनाई जा सकती है। और किसी स्टॉक की उच्च प्राइस और ओपनिंग प्राइस दोनों एक है तो उसमें मंदी की पोजीशन बनाई जाती है।

इंट्राडे ट्रेडर इसे Open=High, Open=Low रणनीति के तौर पर इस्तेमाल करते है। किसी भी स्टॉक का चयन करते समय इस स्थिति को भी ध्यान में रखे जो आपकी मदद कर सकती है।

ओपनिंग रेंज- इंट्राडे ट्रेडिंग के लिहाज से इस रेंज को समझना बेहद जरूरी है। बाज़ार के खुलने के बाद, किसी स्टॉक के पहले 30 मिनट की रेंज को मार्क कर लें। जिसमे उस स्टॉक के उच्च मूल्य और निचले मूल्य को ध्यान में रखें, दिन के किसी भी समय जब वह स्टॉक इस रेंज को जिस दिशा में तोड़ता है उसी दिशा में ट्रेड करें। यह रणनीति 70 प्रतिशत सफल रहती है और आपको एक इंट्राडे स्टॉक के चयन करने में मुख्य भूमिका निभाती है। इसे ओपनिंग रेंज ब्रेकआउट ट्रेडिंग स्ट्रेटेजी भी कहते है।

मार्किट depth (बाज़ार गहराई)- जब आप इंट्राडे ट्रेडिंग के लिए किसी स्टॉक को चुनते है तो उसकी बाज़ार गहराई को अवश्य ध्यान में रखें, यदि किसी स्टॉक में खरीदने वाले बेचने वालों से संख्या में ज्यादा है तो वहां तेज़ी का बनना स्वाभाविक हो सकता है। ठीक उसके विपरीत बेचने वाले यदि खरीदने वालो से ज्यादा मात्रा में है तो स्टॉक में दवाब आ सकता है। यह एक आसान सा लेकिन बेहद काम फार्मूला हो सकता है।


वॉल्यूम- एक ट्रेडर हमेशा अपनी नज़र किसी स्टॉक के वॉल्यूम पर जरूर रखता है क्योंकि किसी स्टॉक में बड़ी तेजी और बड़ी मंदी के लिए यह प्रमुख कारक है। जब किसी स्टॉक में उसके वॉल्यूम में दैनिक वॉल्यूम से अचानक ज्यादा वृद्धि होने लगे तो स्टॉक में किसी बड़े मूवमेंट का इशारा मिल जाता है क्योंकि यह वृद्धि किसी स्टॉक में ट्रेडर्स के लिए आकर्षण पैदा करती है।


मूविंग एवरेज-किसी स्टॉक में तेज़ी और मंदी को समझने के लिए मूविंग एवरेज का इस्तेमाल किया जा सकता है। सबसे ज्यादा ट्रेडर 50 (SMA) को वरीयता देते है यानी 50 दिन का सिंपल मूविंग एवरेज।
जब कोई स्टॉक 50 SMA के ऊपर जाता है तो यह तेज़ी का कारण बनता है और यदि 50 SMA के  नीचे जाता है तो यह मंदी का इशारा होता है। स्टॉक का चयन करते समय उस सटॉक में 50 SMA का भी ध्यान रखें। अपनी रणनीति के अनुसार मूविंग एवरेज की वैल्यू बदल भी सकते है।


Quarterly रिजल्ट्स- स्टॉक चुनते समय उस स्टॉक में आने वाली खबरों पर भी अवश्य ध्यान रखें, जब किसी स्टॉक में कोई बड़ी खबर अथवा उस कंपनी के क्वार्टरली रिजल्ट आने वाले हो, तो ऐसे स्टॉक से दूरी बनाये क्योंकि रिजल्ट के समय कोई स्टॉक 10 प्रतिशत से भी ज्यादा की तेजी अथवा मंदी दिखा सकता है। जोकि आपके नुकसान की बड़ी वजह बन सकती है।

कुछ अन्य बिंदु

  • स्टॉक का चयन ऐसे स्टॉक के तौर पर करें, जो फ्यूचर ऑप्शन सेगमेंट का हिस्सा हो।
  • वॉल्यूम पर्याप्त मात्रा में हो।
  • किसी पैनी स्टॉक का चुनाव ना करे।
  • न्यूज़ चैंनलों पर बताए जा रहे स्टॉक में ट्रेड न करे, ट्रेड करने से पहले स्वयं अध्यन करे।
  • SMS के माध्यम से मिले टिप्स पर ध्यान न दे, आपके साथ कोई फ्रॉड कर सकता है।

उपरोक्त सम्पूर्ण जानकारी ट्रेडर्स के अनुभव पर आधारित है जिसका उद्देश्य आपको शेयर बाज़ार में एक सही स्टॉक चुनने में मदद करने के लिए है।

यह वेबसाइट किसी भी प्रकार के निवेश की सलाह नही देती है निवेश करने से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की मदद अवश्य ले। किसी भी लाभ अथवा हानि के लिए वेबसाइट जिम्मेदार नही होगी।





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